कारवॉं

नयी मंज़िल के मीरे-कारवाँ भी और होते हैं
पुराने ख़िज़्रे-रह बदले वो तर्ज़े-रहबरी बदला
-फ़िराक़ गोरखपुरी

बुधवार, 11 सितंबर 2019

धज्‍जी सम्राट अमर रहें

रोजाना ना जाने कितनी कितनी बार उसकी धज्जियां सरेआम व सरेशाम उड़ायी जाती हैं पर धज्जियों का यह बादशाह कभी हार नहीं मानता। रावण के सिर की तरह उसकी धज्जि‍यां हमेशा उग-उग आती हैं। रक्‍तबीज की तरह अपनी हर बूंद से वह बहुगुणित होता जाता है।
उसकी धज्जियां उडाकर सब प्रसन्‍न व स्‍वस्‍थ रहते हैं। मीडिया की तो टीआरपी ही उसकी धज्जियों के भरोसे चलती है। राजनेताओं की छवि उसकी धज्जियों पर टिकी होती है, यहां तक कि पड़ोसी देशों की सरकारें उसकी धज्जियों के भरोसे चलती हैं।
और तो और अमेरिका, रूस जैसे देशों को भी उसकी धज्जियों की जरूरत पड़ती है। संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ तक उसकी धज्जियों की सेवाएं लने से खुद को रोक नहीं पाता।
उसकी ये अमर धज्जियां ना हों तो पडोसी हुक्‍मरानों की दुनिया बेनूर हो जाए। फिर वे किसी को कैसे देशद्रोही कहेंगे और किसे कहां भेजेंगे।
नर्क तो पहले ही भर चुके हैं हमारे सुकर्मियों के किये से। रोज कोई ना कोई देहरागी स्‍वामी नर्क के दरवाजे पर दस्‍तक देता दिखाई दे जाता है ऐसे में आम लोगों को नर्क का रास्‍ता कैसे बताया जा सकता है।
तो आमलोगों को इसका वास्‍ता दिया जाता है कि सचेत हो जाओ, जरा भी गलती की तो भेज दिये जाओगे इस धज्‍जी सम्राट के पास।

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